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कानून व्‍यवस्‍था को बनाया मखौल



इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने कल यानी 25 सितम्‍बर को जींद में रैली को संबोध्‍ाित किया। उनके भाषण पर गौर किया जाए तो सीधे-सीधे यह स्‍वर्गीय देवीलाल की जन्‍म शताब्‍दी का आयोजन कम और चुनावी रैली अधिक लग रही थी। 
ज्ञात हो कि इनेलो सुप्रीमो को जेबीटी घोटाले में 10 वर्ष कैद की सजा सुनायी जा चुकी है और दिल्‍ली हाईकोर्ट ने उनकी इस याचिका पर कि वह अस्‍वस्‍थ  हैं और उन्‍हें चिकित्‍सकों की गहन देख-रेख की आवश्‍यकता है, 26 तारीख तक अंतरिम जमानत दी थी। प्रश्‍न यह उठता है कि अगर वह अस्‍वस्‍थ थे और उन्‍हें चिकित्‍सकों के गहन निरीक्षण की आवश्‍यकता थी, तो इस रैली में भाषण देने के लिए अचानक स्‍वस्‍थ कैसे हो गए। क्‍या यह कानून व्‍यवस्‍था का मखौल बनाना नहीं है। सवाल यह भी उठता है कि जिस दल का प्रमुख कानून की नजर में धूल झोंक सकता हो, वह दल और उसके नेता जनता का कितना भला कर सकेंगे। 
इनेलो सुप्रीमों ने अपने भाषण में कहा कि उन्‍हें 3000 घरों का चूल्‍हा जलाने की सजा मिल रही है। यही नहीं, उन्‍होंने यह भी कहा कि सत्‍ता में आने पर वह 3 लाख घरों में चूल्‍हा जलाएंगे। उनकी इस बात का क्‍या मतलब समझा जाए। क्‍या यह उन पर साबित दोष ओर न्‍यायपालिका के फैसले का अपमान नहीं है।

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