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पूंजीवाद की पटरी पर दौडने लगी भारतीय रेल

04 जुलाई, 2014

भारतीय रेल द्वारा सेमी हाईस्पीड ट्रेन की दिल्ली से आगरा का सफल ट्रायल सराहनीय है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि हाई स्पीड ट्रेन्‍ज को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार स्पीड की वजह से महज 3 मिनट कम हुए हैं। ट्रायल ट्रेन की अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर रही जबकि भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस 150 किलोमिटर की अधिकतम स्पीड से चलती है। बाकि समय की जो कटौती हुई है वह अन्य कारण ों से हुई है जैसा की 14 बोगीज से 10 बोगीज और ट्रेन का नई दिल्ली स्टेशन से ना चलकर निजामुद्दीन स्टेशन से चलना इत्यादि।

भारतीय रेल की प्राथमिकता वो होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को फायदा हो। मोदी सरकार को ट्रेन में सुविधाएं बढाने, किराया कम करने, रेल विभाग में सक्रियता लाने, ट्रेन की बढोतरी करने (दो-दो महीने तक टिकट नहीं मिलती), हर मौसम में ट्रेन समय पर चल सकें, प्लेटफार्म की व्यवस्थाएं ठीक हों, यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेक्‍स के दोनों तरफ कचरे की सफाई आदि पर ज्यादा जोर देना चाहिए।

मोदी सरकार भारतीय रेल को जो दिशा दे रही है, उससे तो पूंजीवाद की बदबू आती है।

सुदेश अग्रवाल

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