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मोदी सरकार और बदलता परिदृश्य


30 वर्ष के एक लम्बे समय के बाद केन्द्र में बहुमत की स्थाई सरकार बनेगी। भारतीय जनता पार्टी

को 282 सीटें जीता कर बहुमत दिया और NDA के साथ मिलकर 335 सीटें जीती। जनता, नरेन्द्र मोदी, 

भाजपा, आरएसएस, NDA के सहयोगी दल इस बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए बधाई के पात्र हैं। 

भाजपा का लोक सभा में 2 सीटों से 282 सीटों तक पहुँचने का सफर क्या भाजपा की अंदरूनी ताकत को 

दर्शाता है या फिर यह एक अस्थायी विकल्प के रूप में उभर कर आया है। क्या 25 वर्ष से चल रही 

गठबंधन की सरकारों से जनता तंग आ चुकी है। क्या यह सिर्फ पिछले 10 वर्षों की कांग्रेस UPA 

सरकार के कुशासन के खिलाफ जनादेश है। क्या जनता धर्म, जातिवाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद की 

राजनीति से तंग आ चुकी है और वोट बैंक की राजनीति को पूर्णविराम लगाना चाहती है। क्या आज 

के युवा ने विकास और रोजगार के लिए ऐसा बदलाव किया है। ऐसे बहुत से प्रश्न उठते हैं। 

भाजपा का 282 सीटें जीतना सबसे पहले 10 वर्षों से चली कांग्रेस UPA सरकार की कमियोंको 

दर्शाता है। भ्रस्टाचार, घोटाले, कुशासन, महंगाई, बेरोजगारी से जनता ऊब चुकी थी और ऐसे में 

बदलाव होना स्वाभाविक है। कांग्रेस इसको भाप नहीं पाई और वही पुरानी वोट बैंक की राजनीति, 

सम्प्रदायिकता का मुद्दा, अल्पसंख्यकों को खुश रखने की नीति का ढोल पिटती रही जबकि युवा 

मतदाता इन सबसे उपर उठ चुके हैं। अगर कांग्रेस UPA ठीक काम करती तो बदलाव तो शायद फिर भी 

होता लेकिन कांगेस का सिर्फ 44 सीटें लेने जैसा बुरा हाल नहीं होता। 

दूसरा यह भाजपा की अंदरूनी ताकत को भी दर्शाता है। आरएसएस का मजबूत संगठन भाजपा 

का मार्गदर्शक है और पूरी ताकत से पीछे खड़ा है। भाजपा की कई प्रदेशों में अपनी सरकारें हैं 

जबकि कांग्रेस की किसी भी बड़े प्रदेश में अपनी सरकार नहीं है। भाजपा के पास राष्ट्रीय स्तर के 

काबिल नेता भी हैं जो देश को दिशा देने में सक्षम हैं। गुजरात के मुख्य मंत्री रहे नरेंद्र मोदी को 

सकारात्मक रूप से प्रशासन चलाने का अनुभव है और उनकी कार्यशैली का लाभ भी भाजपा को मिला।

 चुनाव प्रचार में मोदी ने अपने संदेश को जनता तक बखूबी पहुँचाया और विश्वास जितने में कामयाब 

रहे। 

एक बात तो साफ़ है कि इतना बड़ा बदलाव कोई ऐसे ही नहीं हो गया और यह भारत के परिदृश्य को 

हमेशा के लिए बदल सकता है। लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी। आजादी के बाद से जिन मुद्दों 

पर राजनीति हुई उन्हें हमेशा के लिया बदला जा सकता है। अप्रत्यक्ष रूप से प्रधान मंत्री का चुनाव 

जनता ने किया और वह जनता की तरफ वफादार होगा। हो सकता है मुख्य मंत्रियों के चुनाव भी आने 

वाले समय में इसी तरीके से हों। समस्त भारतीय पार्टी ऐसी व्यवस्था का समर्थन करती है। 

मोदी सरकार को जनता नेबहुमत दिया इसलिए की वह बगैर किसी अड़चन केदेश की व्यवस्था बदलने

के लिए काम कर सके। गठबंधन की मजबूरियोंपर असफलता का ठीकरा न फोड़े। मोदी सरकार से

जनता की अपेक्षाएं भी बहुत हैं और उन सभी पर खरा उतरना मोदी सरकार के लिए चुनौती होगी। 

मोदी जी का अनुभव एक प्रदेश की सरकार को चलाने का रहा है। प्रदेश की सरकार चलाना और देश 

की सरकार चलाने में बहुत अंतर है और मोदी जी इन बदलती परिस्थितयों में कितनी जल्दी ढलेंगे और 

कितनी कम गलतियां करेंगे, यह तो समय ही बताएगा। 

प्रदेश की सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होती है जबकि केन्द्र सरकार 

को प्रदेशों के विकास के लिए राज्यों की सरकारों के माध्यम से काम करना होता है। केन्द्र सरकार 

के पास बहुत से ऐसे विभाग होते हैं जिनसे प्रदेश सरकारों का कोई लेना देना नहीं होता जैसे की विदेश 

मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, रेल मंत्रालय इत्यादि। देश के लिए नए कानून बनाना, कानूनों की 

समीक्षा करना और केन्द्र और राज्यों के संबन्धों को सही रखना बहुत बड़ी जिम्मेदारी रहती है। अब 

मोदी जी को मैक्रो स्तर के फैसले करने होंगे जो पूरे देश को प्रभावित करेंगे। 

मोदी सरकार को जिन मुद्दों पर तेजी और तीर्वता से काम करना होगा वो हैं, महंगाई पर काबू पाना, 

भ्र्ष्टाचार को कम करना, सक्रिय प्रशासन देना, रोजगार के अवसर पैदा करना, विकास दर में तेजी 

लाना, काले धन को वापिस लाना, महिला आरक्षण बिल को पारित करना, आंतरिक सुरक्षा और 

आतंकवाद पर नियंत्रण करना जैसे अहम मुद्दे मोदी सरकार के सामने होंगे। मोदी जी मंत्रियों का 

चयन किन मापदंडों के आधार पर करते हैं उससे काफी कुछ साफ़ हो जायेगा। 

भाजपा सम्प्रदायिकता के आरोपों को कैसे निपटेगी और आरएसएस, शिव सेना, बजरंग दल जैसे 

संगठनों से कैसा व्यव्हार रखेगी, आने वाले समय में भाजपा की छवि को तय करेगा। राम मंदिर, धरा 

370, यूनिफार्म सिविल कोड जैसे पुराने मुद्दों पर भाजपा का क्या रूख होगा। मोदी जी की नियत और 

इच्छाशक्ति पर शक नहीं किया जा सकता लेकिन उनकी केंद्र की टीम कैसे ताल मेल बिठा कर काम 

करती है उस पर ज्यादा निर्भर करेगा। 

देश की जनता ने मोदी जी के ऊपर विश्वास जताया है की वह देश की राजनीती की दिशा को बदलें और 

धर्म, जातिवाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद की राजनीति को खत्म करें और देश का विकास करें। वैसे तो 

मोदी जी ने देश की जनता को विश्वास दिलाया है की वो सबका साथ लेकर सबके विकास के लिए काम 

करेंगे। क्या मोदी जी अपने अंदर प्रदेश सरकार चलाने की मानसिकता को बदल कर देश चलाने की 

मानसिकता लाने में सक्षम होंगे। अगर वो ऐसा कर पाते हैं तो देश की राजनीती का परिदृश्य हमेशा 

के लिए बदल जायेगा और भाजपा एक लम्बी पारी खेलेगी। वरना 2019 में फिर बदलाव आएगा और वो 

कैसा होगा उसकी मैं इस समय कल्पना भी नहींकर सकता। मैंकामना करता हूँकी मोदी जी एक सफल

प्रधान मंत्री बनें।

लेखक

सुदेश अग्रवाल

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