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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 - जनता का सबसे सख्त इम्तिहान

4 मई,

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 जनता के लिए सबसे सख्त इम्तिहान होने वाला है। जनता को मतदान करने से पहले ऐसी चुनौतियों पर सोच विचार करना होगा जो इस चुनाव से पहले के चुनावों में नहीं थी। जनता को यह भी सोचना होगा कि वह कैसी सरकार चाहती है और कौन उसे दे सकता है। अगर जनता ने भावनाओं में बहकर , जातिवाद , परिवारवाद , क्षेत्रवाद के आधार पर मतदान किया तो आने वाले कम से कम 10 वर्ष तक इसका नुकससान भुगतना होगा। राजनीतिक तंत्र को बदलने का इससे बढिय़ा मौका जनता को कैसे मिलेगा।

 

लोकसभा चुनावों के लिए मतदान हो जाने के बाद अब हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल शुरू हो गई है। हरियाणा विधानसभा का  कार्यकाल अक्टूबर में पूरा होना है। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 जनता के लिए सबसे सख्त इम्तिहान होने वाला है। जनता को मतदान करने से पहले ऐसी चुनौतियों पर सोच विचार करना होगा जो इस चुनाव से पहले के चुनावों में नहीं थी। जनता को यह भी सोचना होगा कि वह कैसी सरकार चाहती है और कौन  उसे दे सकता है। जनता क्या जातिवाद , क्षेत्रवाद को आधार बनाकर वोट करना चाहती है या फिर मुद्दों के आधार पर वोट करेगी। जनता क्या परिवारवाद के  लिए वोट करेगी या फिर इसे नकारेगी ? क्या जनता नेताओं के इतिहास को भी ध्यान में रखेगी या नहीं ? क्या जनता अपने निजी स्वार्थों को ज्यादा महत्व देगी या फिर गांव , कस्बे , शहर के सामूहिक विकास को महत्व देगी ? क्या जनता पार्टी लाइन पर ही वोट करेगी या फिर अगर पार्टी ठीक काम नहीं कर रही तो पार्टी लाइन से हटकर वोट करेगी ? ये सब चुनौतियां जनता के सामने आएंगी।

 

इन चुनौतियों के अलावा चुनाव के मैदान में वो सब पार्टियां होंगी जो इससे पहले नहीं थी। जनता को इनका भी विश्लेषण करना होगा। सभी अपनी अपनी बातें तर्क   से रखेंगे लेकिन विश्लेषण और फैसला तो जनता को करना होगा। किसी एक पार्टी को बहुमत देना है या खंडित विधान सभा के लिए मतदान करना है। निर्दलीय को  जिताना है या नहीं , इस पर भी पूर्व में निर्दलीयों ने क्या किया इसे ध्‍यान में रखना होगा। मुख्य धारा की चार पार्टियों (कांग्रेस , इनेलो , भाजपा व हजका) को  छोड़कर जो नई पार्टियां मैदान में होंगी वो हैं आम आदमी पार्टी , समस्त भारतीय पार्टी , हरियाणा लोकहित पार्टी , टोटल विकास पार्टी। इसके अलावा वो पार्टियां जो दूसरे राज्यों में सत्तासीन हैं या रह चुकी हैं वो भी मैदान में होंगी जैसे कि बहुजन समाज पार्टी , तृणमूल कांग्रेस इत्यादि। इसके अलावा कई और भी पार्टियां हो सकती हैं जो कुछ सीटों पर चुनाव लड़ें। पिछले चुनाव में निर्दलीयों की क्या चांदी हुई , इसको देखते हुए बहुत से निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में होंगे।

अब मैं इन सभी पार्टियों के बारे में क्या सोच रखता हूं बताऊंगा और जनता को  विश्लेषण करके फैसला करना होगा। काग्रेंस पिछले दस वर्षों से सत्ता में है और प्रदेश की बुरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी है। कुछ उपलब्धियों को  छोड़कर कांग्रेस का शासनकाल इतना अच्छा नहीं रहा और केंद्र में कांग्रेस का बुरा प्रदर्शन भी विधानसभा के चुनावों को प्रभावित करेगा। इनेलो परिवारवाद की पार्टी है और इनके शीर्ष नेता भ्रष्टाचार के लिए जेल में हैं। आय से अधिक सम्पत्ति का केस अदालत में चल रहा है। इनेलो के नेताओं की छवि भी साफ नहीं है। इनके कार्यकर्ता स्वार्थ की वजह से एकजुट तो हैं लेकिन आम जनता विधान सभा चुनाव में इनेलो को कैसे लेती है , इससे इसका भविष्य तय होगा। इनेलो के सामने कड़ी चुनौती होगी अगर केंद्र में भाजपा की सरकार बन जाती है। आम आदमी पार्टी , समस्त भारतीय पार्टी भी इनेलो को चुनौती देंगी। माना जाता है कि इनेलो जातिवाद की राजनीति में लिप्त है। अगर इनेलो को अच्छा प्रदर्शन करना है तो इस छवि को सुधारने पर काम करना होगा।  

 

भाजपा-हजका में गठबंधन है और यह कितना चलेगा लोक सभा चुनाव के नतीज़ों पर निर्भर करेगा। भाजपा लोकसभा चुनाव के सकारात्मक नतीजों को लेकर मैदान में उतरेगी। लोक सभा चुनाव के नतीजे विधान सभा चुनाव को ज्यादा प्रभावित नहीं करेंगे। पिछले चुनावों में कांग्रेस की केंद्र में सरकार थी और कांग्रेस ने लोक सभा की 10 में से 9 सीटें जीती थी लेकिन विधानसभा चुनाव में जो कि 5 महीने बाद हुए , कांग्रेस बहुमत भी न ले पाई। भाजपा का कोई ज्यादा बड़ा जनाधार नहीं है लेकिन कुछ कांग्रेसी नेताओं के भाजपा में शामिल होने से ये अपने आप को मजबूत मानेंगे। हजका की छवि धूमिल है लेकिन वह भाजपा के कन्धों पर चढक़र नैया पार लगाने की कोशिश में है। आम आदमी पार्टी के लिए हरियाणा विधान सभा चुनाव लोक सभा चुनावों के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनाव होगा। ये हरियाणा में शोर पूरा मचाएंगे और कांग्रेस , इनेलो , भाजपा + हजका को परिवारवाद , भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेरेंगे। दिल्ली में सरकार बनाने के बाद जो आम आदमी पार्टी ने किया , ये इनकी सबसे बड़ी कमजोरी होगी। अरविन्द केजरीवाल पर जो आरोप लगे हैं , उसका नुकसान भी पार्टी को होगा।

 

समस्त भारतीय पार्टी पिछले पांच वर्षों से हरियाणा में काम कर रही है और एक साफ छवि बनाने में कामयाब हुई है। सभापा भ्रष्टाचारमुक्त , कुशल व बढिय़ा शासन देने की नियत , क्षमता व इच्छाशक्ति रखती है। इसकी छवि सबसे बड़ी ताकत है और जनता अगर राजनीति को नई दिशा देना चाहे तो इसका साथ देना चाहिए। हरियाणा लोकहित पार्टी जो गोपाल कांडा द्वारा अभी घोषित की गई है , इनके नेताओं की पूर्व छवि के बारे में जनता को सोचना होगा। लगता है जातिवाद की राजनीति पर इस पार्टी का जोर होगा। टोटल विकास पार्टी जो राजनैतिक विशेषज्ञ विनोद मेहता द्वारा बनाई गयी है अभी उसका लोकार्पण नहीं हुआ है , आने वाले समय में वह भी सक्रिय हो सकती है। चर्चा यह भी है कि अभी हाल ही में अंबाला शहर से विधायक और कांग्रेस पार्टी छोडऩे वाले विनोद शर्मा भी बहुत जल्दी नई पार्टी बनाने वाले हैं। शर्मा ने विधानसभा से भी त्यागपत्र दे दिया है। बहुजन समाज पार्टी जातिवाद की राजनीति करती है और अपने वोट बैंक को  बचाने में लगी रहती है।

 

तृणमूल कांग्रेस का आधार पश्चिमी बंगाल में है और इससे हरियाणा प्रभारी अपनी राजनीति चमकाने में लगे रहते हैं। हरियाणा के विकास के लिए कोई ठोस एजेंडा नहीं है। पंजाबी बिरादरी को लेकर राजनीति करते हैं।

निर्दलीय को तो पिछला चुनाव देखकर खून मुंह लग गया है। उनकी मानसिकता है कि किसी तरह से चुनाव जीत लें और फिर सौदेबाजी कर लेंगे। जनता के लिए काम करना उनके ध्यान में भी नहीं होता।      

 

आप सभी उपरोक्त विश्लेषण से अंदाजा लगा सकते हैं कि जनता के लिए ये चुनाव कितना मुश्किल होगा। मतदान का फैसला करने के लिए कितनी चनौतियों का सामना करना होगा। मेरा ये मानना है कि अगर जनता ने भावनाओं में बहकर , जातिवाद , परिवारवाद , क्षेत्रवाद के आधार पर मतदान किया तो आने वाले कम से कम 10 वर्ष तक इसका नुकसान भुगतना होगा। राजनीतिक तंत्र को  बदलने का इससे बढिय़ा मौका जनता को नहीं मिलेगा।  

 

- सुदेश अग्रवाल

( लेखक समस्त भारतीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

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