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चुनाव परिणाम पर वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी का असर

12-04-2013
चुनाव परिणाम पर वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी का असर

हरियाणा लोक सभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 67.48 (2009) से बढ़कर 71.4 (2014) हुई। प्रतिशत के हिसाब से तो यह सिर्फ 4 फीसदी बढ़ी लेकिन संख्या के हिसाब से 32 लाख 65 हजार अधिक लोगों ने वोट डाले जो की 2009 में डाले जाने वाले मतों से 40 फीसदी अधिक है। रजिस्टर्ड वोटर्ज की संख्या में 2009 से 2014 तक 39 लाख 9 हजार की बढोतरी हुई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है नए वोटरों का किसी भी सीट को जिताने या हराने में अहम भूमिका होगी। नया वोटर युवा और शिक्षित है और उसकी सोच भी अलग है।

अगर हमें वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी का असर देखना है तो हर सीट का विश्लेषण उम्मीदवारों को ध्यान में रखकर करना होगा। आइये हरियाणा की सभी 10 सीटों का विश्लेषण करते हैं।

अम्बाला

यहाँ पर वोट प्रतिशत सिर्फ 2 फीसदी बढ़ा लेकिन वोटिंग 3 लाख 41 हजार से बढ़ी। बीजेपी के उम्मीदवार रतन लाल कटारिया मोदी की लहर की वजह से जीत जाने चाहियें।

गुड़गावं

यहाँ पर वोट प्रतिशत 10 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 5 लाख 42 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 5 लाख 87 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की गुड़गावं के सिर्फ नए मतदाताओं ने ही नहीं बल्कि शहरी लोगों ने भी ज्यादा मतदान किया।

यह क्षेत्र जातिवाद, धर्मवाद और बुद्धिजीवी वर्ग से प्रभावित है और यहाँ के उम्मीदवार इसी किस्म की राजनिति भी करते हैं। विश्लेषण से लगता है की यहाँ पर टक्कर बीजेपी के राव इंद्रजीत सिंह व इनेलो के जाकिर हुसैन के बीच होगी। मोदी की लहर की वजह से राव इंद्रजीत का पलड़ा भारी हो सकता है।

हिसार

यहाँ पर वोट प्रतिशत 7 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 3 लाख 24 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 3 लाख 15 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की हिसार के सिर्फ नए मतदाताओं ने ही नहीं बल्कि पुराने मतदाताओं ने भी ज्यादा मतदान किया।

यह क्षेत्र जातिवाद और व्यापारी वर्ग से प्रभावित है और यहाँ के उम्मीदवार इसी किस्म की राजनिति भी करते हैं। इनेलो के दुष्यंत चौटाला ने जातिवाद से हटकर राजनीत करने की कोशिश की है और इसी वजह से समस्त भारतीय पार्टी ने भी उनका साथ दिया। हजका के कुलदीप बिश्नोई तो गैर जाट की राजनीति करते हैं। कांग्रेस के संपत सिंह शायद ज्यादा असरदार नहीं होंगे। विश्लेषण से लगता है की यहाँ पर टक्कर इनेलो के दुष्यंत चौटाला व हजका के कुलदीप बिश्नोई के बीच होगी। मोदी की लहर का यहाँ पर हजका को फायदा होता नजर नहीं आता। इनेलो का पलड़ा भारी है।

रोहतक

यहाँ पर वोट प्रतिशत 2 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 2 लाख 8 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 2 लाख 66 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की रोहतक में किलोई (मुख्य मंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा की वजह से) और महम (शमशेर खड़खड़ा का गृह क्षेत्र की वजह से) को छोड़ कर मतदान की तरफ कोई ज्यादा आकर्षण नहीं रहा। इससे बदलाव के संकेत नहीं मिलते। विश्लेषण से लगता है की यहाँ पर कांगेस के दीपेन्द्र हुडा की स्थिती मजबूत है। बीजेपी और इनेलो दुसरे नंबर की लड़ाई पर हैं।

सोनीपत

यहाँ पर वोट प्रतिशत 4 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 2 लाख 53 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 3 लाख 10 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की सोनीपत के सिर्फ नए मतदाताओं ने ही

ज्यादा मतदान किया और यह बीजेपी के पक्ष में जा सकता है।
यह क्षेत्र जातिवाद की राजनीति से प्रभावित है और यहाँ के उम्मीदवार इसी किस्म की राजनिति भी करते हैं। बीजेपी के रमेश कौशिक का पलड़ा भारी लगता है।

कुरुक्षेत्र

यहाँ पर वोट प्रतिशत 1 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 2 लाख 60 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 3 लाख 26 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की कुरुक्षेत्र में मतदान सामान्य रहा। इससे बदलाव के संकेत नहीं मिलते। लेकिन नवीन जिंदल का कोयला घोटाले में नाम होना और कांग्रेस से जनता का दुखी होना उनको पीछे धकेल सकता है। इनेलो के बलबीर सैनी की स्थिति मजबूत नजर आती है। बीजेपी की स्थिति कमजोर रहेगी। आखरी दिन मोदी की लहर बनती नजर आई, यह लहर यहाँ पर कितना असर डालेगी, 16 मई को पता चलेगा।

फरीदाबाद

यहाँ पर वोट प्रतिशत 9 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 5 लाख 6 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 6 लाख 35 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की फरीदाबाद के सिर्फ नए मतदाताओं ने ही नहीं बल्कि शहरी लोगों ने भी ज्यादा मतदान किया।

यह ज्यादा शहरी क्षेत्र है और बुद्धिजीवी वर्ग से प्रभावित है। विश्लेषण से लगता है की यहाँ पर बीजेपी के कृष्ण पाल गुर्जर, इनेलो के आर के आनंद और कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना में त्रिकोण मुकाबला है। मोदी की लहर का फायदा बीजेपी के उम्मीदवार को मिलेगा।

भिवानी महेन्द्रगढ़

यहाँ पर वोट प्रतिशत मामूली सा गिरा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 1 लाख 60 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 2 लाख 38 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की भिवानी महेंद्रगढ़ क्षेत्र में मतदान सामान्य रहा। इससे बदलाव के संकेत नहीं मिलते। यह क्षेत्र जातिवाद की राजनीती से प्रभावित है। लेकिन यहाँ के कई समीकरण बदले हुए हैं। बीजेपी के धर्मबीर सिंह कांग्रेस की श्रुति चौधरी का खेल बिगाड़ सकते हैं। इनेलो के राव बहादुर सिंह अकेले यादव उम्मीदवार हैं और उन्हें इनेलो का जाट वोट भी मिलेगा। इनेलो कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई में सीट निकाल सकती है।

सिरसा

यहाँ पर वोट प्रतिशत 2 फीसदी बढ़ा और वोटिंग 2009 के मुकाबले में 2 लाख 94 हजार से बढ़ी। 2009 से 2014 तक वोटर्ज की संख्या 3 लाख 49 हजार से बढ़ी। इससे साफ़ जाहिर होता है की सिरसा के सिर्फ नए मतदाताओं ने ही नहीं बल्कि पुराने मतदाताओं ने भी ज्यादा मतदान किया। इस सीट पर इनेलो प्रत्याशी चरणजीत सिंह की बढ़त नजर आती है। कांग्रेस के अशोक तंवर को कांग्रेस की गलतियों का खामयाजा सहना पड़ेगा। हजका के सुशील इंदौरा को मोदी की रैली रद्द होने का नुक्सान हुआ है।

सभी सीटों का विश्लेषण करने के बाद यह नतीजा निकाला जा सकता है की वोट प्रतिशत नए वोटरों की वजह से बढ़ा है और इसका चुनाव नतीजों पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। राजनीतिक दलों की कार्यशैली और नेताओं का आचरण ही आज के मतदाताओं को प्रभावित करता है। लेकिन अभी भी बहुत से मतदाता हैं जो भावनाओं में बहकर और जातिवाद व धर्म के नाम पर वोट करते हैं। मेरा यह मानना है की राजनीति बदल रही है और जो दल या नेता अपने आप को नहीं बदलेंगे, वो पिछड़ते चले जाएंगे।

लेखक
सुदेश अग्रवाल
राष्ट्रीय अध्यक्ष

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