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घोषणा पत्र और राजनीतिक दल

05-04-2014

लोक सभा चुनाव का पहले चरण का मतदान 7 अप्रैल से शुरू हो जायेगा और आश्चर्य की बात है कि भारतीय जनता पार्टी अपना चुनावी घोषणा पत्र भी 7 अप्रैल को जारी करने को कह रही है। समझ नहीं आता ऐसा क्यों ? जो लोग 7 और 10 अप्रैल को मतदान करेंगे उनको तो ये भी नहीं पता होगा की भाजपा क्या करेगी। अगर वो भाजपा के पक्ष में मत करते हैं तो वो अंधेरे में तीर चलने के बराबर होगा। मोदी जी कहते हैं कि हमें भारी भरकम घोषणा पत्र की जरूरत नहीं। उनकी पार्टी के पदाधिकारी तो यह भी कह देते हैं की जो मोदी जी ने कह दिया वही हमारा घोषणा पत्र है। इतनी बड़ी पार्टी अगर ऐसी बातें करती है तो उनकी बुद्धि पर आश्चर्य होता है। भाजपा फिर यह क्यों नहीं कह देती की हम घोषणा पत्र जारी नहीं करेंगे। भाजपा घोषणा पत्र जारी करने में देरी के जो बहाने लगा रही है, उनमें ज्यादा तर्क नहीं है।

मुझे लगता है कि राजनीतिक दल घोषणा पत्र को ज्यादा महत्व देते ही नहीं हैं। इसे जारी करना तो एक औपचारिकता को पूरा करना माना जाता है। चुनाव तो जनता की भावनाओं से खेलकर लड़ा जाता है चाहे वो धर्म की हों, या फिर जातिवाद, क्षेत्रवाद , परिवारवाद की हों। जनता भी घोषणा पत्र को ना मांगती है, ना पढ़ती है और ना ही उसको लागू करने की मांग करती है। घोषणा पत्र तो सिर्फ पत्रकारों और टीवी चैनलों पर चर्चा तक सीमित रह गया है। चुनाव के बाद तो इस दस्तावेज को फाईल कर दिया जाता है।

हैरानी की बात है कि जब चुनाव होते हैं तो पुराने घोषणा पत्र पर क्या काम हुआ कोई माँग नहीं करता, ना तो पत्रकार इस मुद्दे को उठाते हैं और ना ही टीवी चैनलों पर चर्चा होती है जबकी यह तो मीडिया का सबसे पहला काम होना चाहिए जिससे जनता जागरूक हो और आने वाले चुनाव में सही मतदान कर सके। श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा कि उन्होँने 90 फीसदी अपने 2009 के घोषणा पत्र को पूरा किया लेकिन इस ब्यान की पुष्टि कौन करेगा और ऐसे ब्यानों की कभी पुष्टि होती ही नहीं और चुनाव निकल जाते हैं।

मेरा यह मानना है की जब घोषणा पत्र तय्यार होता है उसमें कुछ फीसदी ही वास्तविक्ता होती है बाकि तो सब सब्ज़बाग दिखाने के लिए और मीडिया में चर्चा के लिए होता है। शायद भारतीय लोकतंत्र की यही विडंबना है। मैं तो ये चाहूंगा कि चुनाव आयोग ऐसे कानून बनाये जिससे सत्तासीन राजनीतिक दल चुनाव की घोषणा से 2 महीने पहले अपने घोषणा पत्र में दिए गए कार्यों पर उन्होंने क्या काम किया उसका ब्यौरा देना अनिवार्य हो। इससे राजनीतिक दल भी सुधर जायेंगे और जनता भी सही मतदान कर पायेगी।

पार्टी का घोषणा पत्र एक अहम दस्तावेज है जो पार्टी की सोच को दर्शाता है। पार्टी की आर्थिक, सामाजिक, वितीय, आधारभूत ढांचे जैसी नीतियों का खुलासा करता है। यह पार्टी की कार्यशैली को भी तय करता है।

पार्टी कि जवाबदेही भी घोषणा पत्र से तय होती है। पार्टियां अगर संजीदा हों तो उन्हें घोषणा पत्र पर कई महीने पहले काम शुरू कर देना चाहिए और चुनाव की तारीख घोषित होने के एक सप्ताह के अंदर जारी कर देना चाहिए जिससे उसका प्रचार हो सके और जनता सही फैसला कर सके । लेकिन ऐसा होता नहीं है क्योंकि राजनीतिक दल जनता को भ्रमित रखना चाहते हैं। चुनाव आयोग को भी पार्टियों को समय सीमा के अंदर घोषणा पत्र जारी करना अनिवार्य करना चाहिए।

मैं जनता, बुद्धिजीवी वर्ग और खास तौर पर मीडिया से अपील करना चाहूंगा कि वह राजनीतिक दलों पर समय पर घोषणा पत्र जारी करने का दबाव डालें और जो ऐसा ना करे उसका बहिष्कार करें। इससे भावनाओं पर आधारित राजनीति भी खत्म होगी और व्यवस्थाएं सुधरेंगी।

लेखक
सुदेश अग्रवाल
समस्त भारतीय पार्टी

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