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"भाजपा का हजकां के साथ गठबंधन" व "सभापा का इनैलो को समर्थन

01-04-2014

भारतीय राजनीति में एक नया   इतिहास 25  मार्च को लिखा गया जब समस्त भारतीय पार्टी और इंडियन ने शनल लोक दल के बीच हरियाणा प्रदेश हित में   लोकसभा चुनाव को लेकर  4 मुद्दों पर सहमति बनी और औपचारिक रूप से   समर्थन पत्र (MOU)  पर पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने हस्ताक्षर किये। इस MOU में दोनों पार्टियों की जिम्मेदारियां लिखी हुयी हैं जो आने वाले समय में उनकी जवाबदेही तय करती हैं। इनैलो के नेता श्री अभय चौटाला ने प्रे कान्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने राजनितिक दलों के बीच हुए MOU पर पहली बार हस्ताक्षर किये हैं और ऐसा होते पहली बार देखा है।  

 

उधर भारतीय जनता पार्टी और हरियाणा जनहित कांग्रेस के बीच बहुत अर्से से गठबंधन घोषित किया हुआ है और यह मौखिक है। इस गठबंधन की क्या शर्तें हैं किसी को कुछ पता नहीं।   मीडिया के माध्यम से जो बातें सामने आयी हैं , वह तो पार्टियों के स्वार्थ को दर्शाती हैं और प्रदेश हित के मुद्दों की कोई बात कहीं नजर नहीं आती।  

 

अब सभापा - इनैलो और भाजप - हजका के समझौते की तुलना करते हैं

 

1. सभापा इनैलो में SYL कनाल के मुद्दे का समाधान करवाने पर सहमति बनी। इससे किसानों को फायदा होगा।

 

उधर भाजपा हजका में 8 और 2 लोक सभा की सीटें लड़ने पर सहमति बनी। सीटें जीत कर क्या करेंगे उसका कोई जिक्र तक   नहीं।

 

2. सभापा इनैलो में हरियाणा प्रदेश पर चढ़े 80,000 करोड़ रू पए   से ज्यादा कर्जे पर ब्याज और किश्त की वापसी पर  5 वर्ष के लिए रोक लगवाने पर सहमति बनी। इससे प्रदेश के पास 16,000 करोड़ रूप हर वर्ष विकास के लिए उपलब्ध होंगे।

 

         उधर भाजपा हजका में हरिया णा विधानसभा   की 45 : 45 सी टों पर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी। प्रदेश में सीटें जीत कर क्या करेंगे कुछ पता नहीं।

 

3. सभापा इनैलो में हरियाणा में 4 लेन स्टेट हाइवे ( उत्तर से दक्षिण पूरब से पश्चिम ) बनाने के लिए काम   करने पर सहमति बनी। इससे प्रदेश का औद्योगिकरण होगा , रोजगार के अवसर पैदा होंगे और लोगों की आमदनी बढ़ेगी।  

 

    उधर भाजपा हजका में ढाई - ढाई वर्ष के लिए मुख्यमंत्री बनने पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री का जेंडा क्या होगा उस पर कोई चर्चा   नहीं।

 

4. सभापा इनैलो में केंद्र सरकार द्वारा घोषित योजनाओं को आने वाले 5 वर्ष में पूरा करने पर सहमति बनी। इससे प्रदेश की जनता को समय पर लाभ मिलेगा।

 

    उधर भाजपा हजका गठबंधन में इसका कोई अता - पता नहीं।

 

5. सभापा इनैलो में स्वच्छ राजनीति करने जातिवाद की राजनीति करने पर सहमति बनी। इससे प्रदेश में भाईचारा बढ़ेगा और सामाजिक समस्याएं कम होंगी।

 

    उधर हजका भाजपा अप्रत्यक्ष रूप से गैर जाट की राजनीति की बात करते हैं।  

 

उपरोक्त विशलेषण से आप नतीजा निकाल सकते हैं कि भाजपा हजका गठबंधन सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ की राजनीति के लिए है और सीलिए इनमें बार - बार झगडे होते हैं। जिसका स्वार्थ पूरा नहीं होता , गठबंधन तोड़ने की चर्चा शुरू कर देता   है। उलूल -जुलूल बयान आते हैं जैसा कि हाल ही में हुआ जब जाट बहुल्य क्षेत्र नारनौंद में हजका नेता   रेणुका बिश्नोई ने कहा कि भाजपा के मुख्य मंत्री कैप्टन अभिमन्यु होंगे जो जाट   हैं   जिसे भाजपा ने नकारा। वैसे भी हजका नेता भाजपा के मुख्य मंत्री पर कैसे टिप्प्णी कर सकती है।   हमें समझ नहीं आता कि ये गठबंधन लिखित में क्यों नहीं करते और गठबंधन प्रदेश हित में क्या काम करेगा , नता को इस बारे में विस्‍तार से क्‍यों नहीं बताते। करनाल की सीट को लेकर जो ड्रामेबाजी हुयी प्रदेश की जनता सब जानती है।  

 

उधर सभापा द्वारा इनैलो को लोकसभा में समर्थन की शर्तें लिखित में बि ल्‍कुल साफ़ है और MOU की कापी सार्वजानिक की गयी   है। दोनों को अपना - अपना काम करना है और ऐसे में झगडे का सवाल ही नहीं पैदा होता। हाँ , अगर कोई अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं करता तो वह जवाबदेह है और मुकर नहीं सकता।  

 

भा पा जनता से अनुरोध करती है की वह मांग करे कि   अगर पार्टियों में कोई समझौता या गठबंधन होता है तो वह लिखित में हो और उसे सार्वजनिक किया जाये। और जो राजनीतिक पार्टी ऐसा   नहीं करती , जनता उस गठबंधन को नकारे और उन्हें मतदान करे।

 

लेखक  

सुदेश अग्रवाल  

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